अस्तित्व और व्यक्तित्व
- आदित्य नारायण अग्निहोत्री अस्तित्व शत-शत वंदन अस्तित्व तुम्हें, जनते हो वह व्यक्तित्व जिन्हें, पाकर धरती हो गयी अमर, छूकर मानवता हुई प्रखर, आलिंगन में जिनको लेकर, अक्षय आशीष जिन्हें देकर, ममता का स्वर हो गया मुखर| सदियों की धूल न छिपा सकी, जिनकी किरणों का पुंज उन्हें, शत-शत वंदन अस्तित्व … More…